वर्ष प्रतिपदा उत्सव

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की कार्य पद्धति में छ: उत्सवों को विशेष स्थान प्राप्त है। इनमें वर्ष प्रतिपदा-वर्ष में पड़ने वाला प्रथम उत्सव है। यह उत्सव प्रतिवर्ष चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को मनाया जाता है। इस वर्ष (अंग्रेजी कैलेंडर 2017) में चैत्र शुल्क प्रतिपदा विक्रमी संवत 2074 तदनुसार 28 मार्च 2017  को पड़ने वाली है।

ब्रह्म पुराण के अनुसार चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के दिन ही ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना की थी –

चैत्र मासि जगद् ब्रह्म संसर्ज प्रथमेनि । 

शुक्ल पक्षे समग्रं तु तदा सूर्योदये सति ॥

 

भारत में अनेक काल गणनाएँ प्रचलित है जिनमे निम्न प्रमुख है ।

१.  कल्पाद्ध, २. युगाब्द, ३. सृष्टि सम्वत्. ४. वामन सम्वत्, ५. श्रीराम सम्वत्, ६. श्रीकृष्ण सम्वत्, ७. युधिष्ठर सम्वत्, ८. बौद्ध सम्वत्, ६. महावीर जैन सम्वत्, १०. श्री शंकराचार्य सम्वत्, ११. विक्रम सम्वत, १२. शक सम्वत्।

 

नवीन सम्वत् का प्रारम्भ किसी राष्ट्रीय महत्व की घटना की स्मृति अथवा अपने युग पर प्रभावकारी भुमिका निभाने वाले महापुरुष के नाम पर प्रचलित हुए हैं।

विक्रम सम्वत् महाराजा विक्रमादित्य की शकों पर निष्णार्यक विजय की स्मृति स्वरूप प्रारम्भ हुआ इतिहासकारों का कथन है कि ईसा पूर्व भारत के पश्चिमी भू-भाग पर शकों ने अपना आधिपत्य स्थापित कर लिया था। सांस्कृतिक नगरी उज्जैन शकों की प्रमुख केन्द्र बन गई भी और सम्पूर्ण पश्चिमी भारत में उनके कई राज्य स्थापित हो गये थे। यहाँ तक कि उत्तर प्रदेश के मथुरा जनपद तक शकों का विस्तार हो गया था। ऐसी परिस्थति में वीर विक्रमादित्य ने शकों को भारत से बाहर खदेड़ने का निश्चय कर उन पर भीषण प्रहार किया और विदेशी शकों को भारत से भगा कर मातृभूमि को मुक्त कराया । इस विजय के कारण ही विक्रमादित्य शकों का हरण करने वाला अर्थात “शकारि विक्रमादित्य” के नाम से इतिहास में प्रसिद्ध हुए और इस विजय की स्मृति को चिर स्थाई बनाने के लिए विक्रमी संवत प्रारम्भ किया गया ।

 

वर्ष प्रतिपदा से अनेक प्रमुख घटनाएं जुडी हुई है जैसे –

१. भगवान श्री राम का राज्याभिषेक

२. युधिष्ठिर का राज्याभिषेक

३. वरुण अवतार संत झूलेलाल जयंती

४. द्वितीय द्वितीय गुरु अंगददेव जी का जन्म

५. आर्य समाज की स्थापना

६. संघ संस्थापक डॉ केशव बलिराम हेडगेवार जी का जन्म

वर्ष प्रतिपदा संघ संस्थापक प.पू.डी.केशव बलिराम हेडगेवार जी का जन्मदिवस भी है। अत: इस अवसर पर उनका स्मरण प्रेरणादायी होता है। उनकी जन्मजात देशभक्ति से जुड़े संस्मरण-रानी विक्टोरिया के राज्यारोहण पर बर्टी मिठाईयाँ न खाना, सीता बर्डी के किले से यूनियन जैक उतारने का प्रयास, वन्दे मातरम् का उद्घोष तथा विद्यालय से निष्कासन आदि घटनाओं का वर्णन कर सकते हैं। साथ ही कुशल संगठक, व्यक्ति निर्माण के विशेषज्ञ एवं आदर्श स्वयंसेवक की व्याख्या करने वाले उदाहरणों का उल्लेख कर सकते है ।

 

-: अमृत वचन :-

प.पू श्री गुरूजी ने कहा कि पूजनीय डाक्टर जी की जन्मतिथि मनाते हुए हम लोग इस संस्मरणीय प्रसंग पर जो कुछ विचार करते हैं और कहते हैं। उसे अक्षरश: अधिक तीव्रता से कृति में उतारें। कठिनाईयों पर ध्यान न देते हुए आगे बढ़े और विश्राम की कल्पना छोड़े । संघ प्रवर्तक ने संघ कार्य को विस्तार देने में कितना कष्ट झेला, किस प्रकार अपना खून पसीना एक किया उसका स्मरण करें । उस महापुरुष ने जिस महान कार्य को बीज रूप से विशाल वृक्ष बनाया, जिसके लिए उन्होंने भागीरथ प्रयत्न किया और अपने आप को उसी में मिलाया, उस महान यज्ञ में हम अपना पूर्ण योग्य दें।