मीडिया का दोहरा चरित्र फिर उजागर

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गत दिनों आईपीएस अधिकारी चारु निगम के आँसू निकलने की घटना हमें याद होगी किस प्रकार से मीडिया इस घटना को नारी स्मिता और सम्मान के साथ जोड़कर स्पेशल कवरेज चलाती रही। चासनी में लपेट कर जायकेदार खबरे परोसने की जैसे प्रतिस्पर्धा सी लग गयी थी, बेचारे विधायक तो सिर्फ इस बात से दुःखी थे कि आईपीएस चारु निगम के निर्देश पर एक गर्भवती महिला को बुरी तरह खींचा गया लेकिन मीडिया ने विधायक को विलन बना दिया। आईपीएस अधिकारी की आँसू निकलने वाली वीडियो क्लिप दिखा-दिखाकर खूब सहानुभूति बटोरी गयी।

कुछ ऐसी ही ‘महिला के आँसू निकलने वाली’ घटना कल दिल्ली में हुई। जब सरकारी अस्पताल की कुछ महिलाये अपनी गुहार लगाने के लिए कई बार आग्रह करने पर भी मुख्यमंत्री केजरीवाल से मिलने का समय ना मिलने के कारण प्रातःकाल उनके निवास पर पहुँच गयी। आशा थी आम आदमी की राजनीति करने वाले केजरीवाल महिलाओ से मिल कर उनको कुछ सांत्वना जरूर देंगे, परन्तु यहाँ तो उल्टा केजरीवाल के सुरक्षाकर्मियों द्वारा उन्हें धक्के मार कर हटाया गया। बेचारी महिला केजरीवाल के गाडी के आगे रोती बिलखती चिल्लाती रही “घर में खाने की लाले पड़े है, भूखो मरने जैसे हालात है” परन्तु केजरीवाल अपनी गाडी का शीशा बंद किये अंदर बैठे रहे ।

मीडिया जगत में इस घटना को कुछ ख़ास तबज्जो नहीं मिली, कुछ चैनल्स ने फ़ास्ट बुलेटिन में 2-3 मिनट की खबर दिखा कर इतिश्री कर ली। आईपीएस अधिकारी चारु निगम के केस में नारी स्मिता और सम्मान की बड़ी बड़ी बाते करने वाली मीडिया इस बार खामोश रही। इस बार मीडिया को महिला के आँखों से छलक रहे आँसू दिखलाई नहीं दिए, जबकि महिला रो-रो कर चार महीने से केजरीवाल से मिलने का समय न मिलने का दुःख व्यक्त कर रही थी। इस घटना ने मीडिया का दोहरा चरित्र एक बार फिर उजागर कर दिया है।

— मुकेश, राजेंद्रनगर, साहिबाबाद

mukesh gupta

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